Sunday, June 7, 2009

डॉ.पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह और डॉ.अंशु माला सिंह ,बैकुंठी

Saturday, June 6, 2009

दोहे ,तुम्हारे लिए

गली गली में राधाये, गली गली में कृष्ण
मन ही मन उत्तर मिले ,नही पूछने प्रश्न

छिप छिप कर मिलते रहे अब तक कितनी बार
गुलमोहर की छाव में पकड़ गए कचनार

ठगने वाले ठगे गए है अब की पहली बार
ठाढे मोल हुए है सौदे , पहली पहली बार

अमलतास धीरे से बोला , आओ आओ मैना
छिप छिप के प्यार करे, और मिलाये नैना

Monday, June 1, 2009

यदि मै उसको अपना कहता तो फ़िर कौन तुम्हारा होगा
क्या तुमको क्या मुझे मिलेगा यदि उसका बटवारा होगा
जो मेरा है वही तुम्हारा बोलो अब क्या प्रश्न शेष है
मत जीवन की करो कल्पना देखो कितनी सास शेष है
गत तो गत है आगत को मै देखा रहा टकटकी लगाये
किसी तरह यदि दिन बीता तो देखो कितनी रात शेष है
मत जीवन की करो कल्पना देखो कितनी सास शेष है

Thursday, May 21, 2009

hi
hi

Friday, May 15, 2009

यदि आप अपने को सुन्य समझते है तो आप समपुर्न्य है