Thursday, June 18, 2009

राम खिलावन हाजिर है


पानी पर पहरा ,लगा है ,बलभद्र ने ताजे समाचारों से राम खिलावन को अवगत कराया पहरा लगा है मतलब ,पानी को नजर बंद कर दिया या पानी ने कुछ लफडा किया है पानी ने नही लोगो ने लफडा किया है और सालो साल से कर रहे है पानी के साथ पानी की न कभी इज्जत की और न ही सोचा की जल न होगा तो कल भी न होगा ,जो जितना कर सकता था बर्बाद उतना किया अब पानी की बारी है तो लोगो ने पानी पर पहरा लगा दिया कर क्या रहे है लोग राम खिलावन ने बोला
रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून
पानी गए न उबरे मोटी मानुष चू न
रहिमन दादा की बाते लोग भूल गए ,रहिमन क्या केवल किताबो के पन्नो में ही रह गए क्या ? दफ़न होके वाह मेरे देश वाह ,और देश के नागरिक तो अदभुत है ही ,कितने पाखंडी है हम ,कभी सोचा है आपने अपने बारे में ,पाखंड ओठे टहल रहे है हम गर्भवती महिलाओ की तरह ,आ,उ करते ,कब करेंगे कुछ ,या यूही ,अपने गिरेबान में न झांक कर दूसरो पर ही दोष
nikaalte nikaalte मर जायेंगे ,marenge क्या मरे तो है ही ,येअलग बात है की jalaaye बाद में जायेंगे
किसी दिन हम हवा को भी puuri nigalane wale है कहो कैसी रही ,बलभद्र
सरकार को तो कभी किसी को दोष देते हम aghaate नही है पेट नही भरता हमारा ,कभी bharega भी नही ,khali पेट बजा रहे हो बलभद्र ,कभी भरा पेट bajaaye हो बलभद्र ,bajana भी नही मर जाओगे
खाली dabba ,खाली botal लिए ghum रहे है पानी के लिए ,videshi तो सोना jwaharat ही ले गए थे पानी तो deshwashiyo के लिए छोड़ गए थे उसे हम ले मरे ,talabo से itana प्यार था की उस पर घर बन गए ,nadiyo से
भी हम प्यार करते थे की puujate थे ,अब कहा गई पूजा और कहा गई वो nadi
koin ले गया ,हमसे chura के ,हमसे भी बड़ा wala rha होगा वो ,है अपने में से ही ,hariyali किसने kaati पड़ोसी ने ,talab पर imarate किसने banai पड़ोसी ने हमने कुछ नही किया हमेशा की तरह ...........हम तो बस जी रहे है क्यो की ...................नही आती
राम खिलावन और बलभद्र aapas में बाते कर रहे थे की तभी किसी ने बोला हम vikash कर रहे है की vinash कुछ बोलो राम खिलावन ,हम sunhare कल की और ja रहे है या .............pahucha गए है ,बोलो न राम खिलावन
बलभद्र सोच रहा था ,sala daru भी तो पानी से बनती है ,usake लिए पानी की कमी नही है ,कोई पहरा नही है

Wednesday, June 17, 2009

राम खिलावन हाजिर है


राम खिलावन चुप चाप परे है ,खटिया में ,और चिंतन जारी है
रहिमन चुप हो बैठिये देख दिनन के फेर
अच्छे दिन जब आयेगे एको लगे न देर
राम खिलावन दिनों के फेर में बदलाहट देख ,रहीम की बात याद कर चिंतन कर रहे है की बिना ,अनुभव के तो रहीम दादा ने ये लिखा न होगा ,उनके भी दिन फिरे होगे जैसे घूर के फिरते है ,घूर पड़ा रहता है ,चुप चाप, लोग और घूर उसी घूर में डालते रहते है ,घूर में घूर नही डालेंगे तो किसमे डालेंगे ? तुम्हारे ऊपर फेके ,क्या ?
फेक दो ,हम भी घूर से क्या कम है ,लेकिनयाद रखना , घूर के भी दिन फिरते है बोलो क्या इरादा है ?अभी तो फेकेगे ही फ़िर की फ़िर देखि जायेगी
हम सब एक दुसरे के ऊपर क्या नीचे से भी घूर फेके जा रहे है अहिर्निश आस पास जो है सो है ही ,दूर से दूर बैठे जान और अनजान लोंगो पर भी घूर फेकने में पूरी ताकत लगाये रहते है पूरी उर्जा को हम दुसरे की बुराई देखने में ही झोके रहते है ,दुसरे की अच्छाई देखने में हमारी आँखों को मोतिया बिन्दु न हो जाए इस डर से देखते ही नही बलभद्र यही सोचता है और इलाके भर के लोगो के बारे में उसे वो हर बात पत्ता है जो उन्हें ख़ुद नही मालूम ,लोग
अपने बारे में सही सही पत्ता लगाने बलभद्र के पास आते है और बलभद्र उन्हें उनके बारे में वो सभी बाते दिल खोल कर बताते जो व्यक्ति विशेस को भी नही पत्ता होता और वह अपने बारे में इतनी सारी बाते जान कर , वो हट प्रद हो जाते,अचकचिया जाते किम कर्तव्य की भूमिका निभाने लगते और इस रोल को वे बखूभी निभाते निभाते घर पहुचते ,और मुह ओरमा के चित हो कर ,खटिया में धस जाते ,और धसे धसे कब सो जाते उन्हें ख़ुद पत्ता नही लगता जैसे उन्हें ख़ुद के बारे में पत्ता नही होता ,खैर फ़िर उनकी दयामयी पत्नी यानि की अर्धांगनी ,उस बेसुरे को जगाती ,जो बेसुध होते ,सुध में आते और फ़िर किग्न्कोंग की तरह अपने कर्तव्य शुरू कर देते
बलभद्र के पास सब का ईन्शाय्क्लूपिदिया है आप का भी है ...........................अपने बारे में यदि जानना हो तो ,आप बलभद्र से संपर्क कर सकते है
खैर ,मोतिया बिन्दु के डर से डरे नही ,कुछ नही होगा ,जब होना होगा तब आप रोक भी नही सकते ,हा ये बात जरुर है की यदि आप दूसरो की अच्छैया देखना सुरू कर देंगे तो निश्चित है की आपको मोतिया बिन्दु का प्रकोप नही होगा ,ये सब आप पर निर्भर करता है की आप क्या चाहते है ,घूर के दिन भी फिरते है ,आप के भी फिरेंगे ,हा घूर फिकवाते रहे आप ,अपने आप पर,पर उनका क्या होगा जो घूर फेक रहे है और फेके जा रहे है बिना रोक टोक ,
राम खिलावन का चिंतन यही है
निदक नियरे रखिये आगन कुटी छवाए ,बिन पानी साबुन बिना निर्मल होय सहाय
राम खिलावन के चिंतन से आप कितना सहमत है ये जरुरी नही है पर राम खिलावन का चिंतन जारी है साथ ही बलभद्र का भी .....................................










Tuesday, June 16, 2009

राम खिलावन


राम खिलावन हाजिर है






राम खिलावन हाजिर है

राम खिलावन हाजिर है




राम खिलावन सरकार को सरकते हुए देख रहे थे ,सरकते सरकते सरकार ,बेकरार हो गई थी ,राम खिलावन का चिंतन था की सरकार , बेकरार नही बेकार हो गई थी , बेकरार हो कर सरकार कुछ कदम उठाना चाह रही थी ,लेकिन उठा नही पा रही थी ,कोई कह रहा था की ,लकवा लग गया है ,राम खिलावन कह रहे थे की बहुत दिनों तक जिस अंग का उपयोग नही करोगे ,तो क्या होगा , यही होगा बलभद्र जो पास ही ताजे अखबार की सुर्खियों से ले कर ,सब कुछ पठने में तलीन थे अचानक बोल पड़े वही होगा जो मंजूरे खुदा होगा राम खिलावन बिफर पड़े ,ये क्या बात हुई ,जो सरकार को मंजूर होगा वह क्या नही होगा ? काहे को होगा ,बलभद्र बोले ,राम खिलावन से रहा नही गया ,बोले ,क्यो बे क्यो नही होगा ?
काकू तुम भी न ,कभी कभी जान के भी अनजान बने रहते हो ,हा ,हा बोलो बोलो क्या बोलना चाह रहे हो बे ,
काकू क्या तुम्हे मालूम है की खुदा की क्या मर्जी है ,जो हो जाता है वही तुम खुदा की मर्जी समझ लेते हो ,और कहते हो की यही खुदा की मर्जी है ,खुदा की मर्जी के आगे किसकी क्या चली है ,बोलो यही कहते हो ना हा बे यही कहता हु आगे बोल, राम खिलावन अपनी भ्रगुती तानते हुए बोले , काकू सुनो _क्या सरकार भ्रस्ताचार फैलाना चाहती है ?बलभद्र अपनी कछनी को एक विशेस दिशा की और घुमाते हुए बोले
राम खिलावन बोले _नही तो और हमने सुना भी नही की सरकार की कोई मनसा है ,तो फ़िर काहे बगरा है चारो और बिना सरकार की कोई योजना के ?,यह मान लिया जाए की सरकार की योजना के बिना भी बहुत सी योजनाये चलती रहती है क्या ? राम खिलावन भौचके से बोलते और सुनते रहे और यह भी सोच रहे थे की बलभद्र को ये कैसी बाते सूझने लगी है ये तो फिलासफर जैसी बाते करता है साला
बलभद्र बोले काकू ,सुनो जब खुदा की मर्जी के बिना कोई पत्ता नही हिलता तो बिना सरकार के मर्जी के कुछ हिल सकता है कोई योजना चल सकती है क्या तुम्ही बताओ
तो क्या यह मान लिया जाए की खुदा की और सरकार की मर्जी एक है और दोनों मिले हुए है और हम खुदा के बन्दे यहाँ अपनी.....................
कुल मिला , कर धक्का खाए गाजी मिया , मजा मारे मुजफ्फर
यही राम खिलावन का चिंतन उभर कर bahar आया
खैर जो हो,सो हो ,राम खिलावन आज बलभद्र की bato से avibhut हो चले थे और सोच रहे थे की बलभद्र को अपनी gaing में samil कर कुछ बुरा नही किया है बलभद्र के ये krantikari विचार सुन कर राम खिलावन की pulli thhili हो गई थी चिंतन कर रहे थे की क्या बलभद्र सही कह रहा था की दोनों मिले हुए है ,कुछ न कुछ तो है
और ये कुछ को तो राम खिलावन
pahale से ही talash रहे है ,मिला नही ये अलग बात है
राम खिलावन का चिंतन jari है ,बलभद्र अपनी
saykil में sawar हो दूर निकल गए थे कुछ ये gungunaate हुए ...........
ये malik तेरे बन्दे हम ..............
ease हो हमारे करम ......................................

Sunday, June 14, 2009

राम खिलावन हाजिर है

राम खिलावन यत्र ,तत्र ,सर्वत्र हाजिर है देखे आज कही आपके पास तो नही पहुच गए
कही वे आकार लिए होते है तो , कही निराकार ,आकार से तो आप उन्हें पहचान लेगे यदि आखे हुई ,बटन नही ,पर निराकार होने ,पर कैसे पहचान पायेगे ?
राम खिलावन का चिंतन यह है की आप तो आकार लिए हो पर क्या अपने आप को पहचान पाए हो की हमें ही पहचान पाओगे ?
हम सब बाहर की दुनिया में जीते है अन्दर की दुनिया में जाने में नानी याद आती है ,
राम खिलावन कहते है
बाहर कंकर ,पत्थर ओ ,अन्दर गौरी शंकर
ये उसने कही सुन रखा था सो सब को यही बताया करता था ,
उसकी इन बातो को ज्यादातर लोग अनसुना कर देते है जैसे आप कर रहे है
कुल मिला कर राम खिलावन अन्दर का मॉल बाहर ही तो करने को कह रहे है पर कौन करता है अन्दर का मॉल बाहर , सब बाहर का मॉल अन्दर करने में लगे है ,आप की क्या राय है ,अपने बारे में ,दूसरे के बारे में न कहे तो बेहतर होगा ,पहले अपने आप से पूछ ले ,अपने आप को जान ले ,फ़िर दुसरे के बारे में जाने
राम खिलावन अपने को जानता है दूसरो को जानने की कोशिश भी नही करता क्यो करे ,जान कर करेगा भी क्या? ,आचार डालने के लायक भी तो नही hai koi
बलभद्र कहता है वो सब को जानता है ,अपने को छोड़ कर ,
ये अलग बात है की उसे कोई नही जानता
हम राम को, बलराम को ,जानते है खुदा की खुदाई को भी जानते है ,
पर अपने आप को क्यो जानने की कोशिश नही करते ?
शायद किसी ने रोका है आपको ?
राम खिलावन का चिंतन यह है की किसी ने नही आप ने ख़ुद अपने आप को रोक रखा है
बाहर आनंद है तो अन्दर , परमानद है
राम खिलावन ,मोलश्री के पेड़ के नीचे बैठे',चिंतन कर ही रहे थे की ,बलभद्र प्रशाद ,अपनी कछनी संभालते संभालते पहुच ही गए ,
रामखिलावन बोले ऐचेकताना ,कहा से सवारी आ रही है ?
का बताई ,कहा से आ रहे है ,
सोसायटी गए रहे की कुछ राशन ले आवे ,
तो का हुआ,
राशन सब ख़तम और का ,चले आए मुह लटकाए ,पता नही कोउन लईगा हमारे नाम का राशन?
बोखवा sudama bhi vahi baitha raha ham to chale aaye par wo abhi bhi baitha hai
intjar me
किसके इंतजार में ? रामखिलावन ने पूछा
सोसायटी के बाबू के और किसके ,
अच्छा अच्छा ,हम सोच रहे थे की वहा अफशर ही अफशर होते है खैर ,खुदा खैर करे ,सुदामा का
बलभद्र ,पास ही पड़े ताजे अखवार के समाचार पठने लगे
मुनाफाखोरों को बक्सा नही जाएगा ,बक्सों में बंद कर दिया जायेगा ,सुनो ,सुनों ,सुनो ,
आज की ताजा ख़बर सुनो
और कब खोला जाएगा यह सरकार तय करेगी सुनों ,सुनों ,सुनों
आज की ताजा ख़बर सुनों
रामखिलावन का ताज़ी ख़बर पर चिंतन जारी है ,
ये अलग बात है की उनके बाप रोज ताज़ी ख़बर ही पढ़ते थे ,जो दूसरे दिन बासी हो जाती थी और फ़िर वो भूल जाते थे की कल क्या ख़बर थी ,क्यो की वे वर्त्तमान में जीते थे और रामखिलावन भी अपने बाप की तरह वर्तमान को ही जीता है ,बासी बातो,खयालातो को राम खिलावन लात मारता है
बिल्कुल अपने बाप की तरह
रामखिलावन गुनगुना रहे है लागा चुनरी में दाग छिपाऊ कैसे ,घर जाऊ कैसे ,लागा चुनरी में दाग ............