Friday, June 19, 2009

राम खिलावन हाजिर है

राम खिलावन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बोल रहे है ,
यत्र नारिश्य पुजनते तत्र रमन्ते देवता ,
भोपाल ,पहुच कर राम खिलावन दंग रह गए ,चिंतन क्या करते सोच भी नही पा रहे थे की ये हो क्या रहा है अपने बाल नोच रहे थे ,ये वही देश है न जहा ये श्लोक लिखा गया है युग बदल गया ,लोग बदल गए रंग बदल गए ,लोगो के ढंग बदल गए ,सोच का तरीका बदल गया , और बदले हुए सोच के साथ सुनहरे कल की ओर बढ़ चले ,बढ़ चले क्या बढ़ गए और छा गए अखबारों में सुर्खियों में छोटे मोटे काम करोगे ,छोटे बने रहोगे ,छोटे काम करोगे , नए युग में लोग क्या कहेगे छोटी सोच का छोटा जादू ,तुम बड़ा जादू दिखाना चाहते हो न क्यो की तुम्हारी सोच बड़ी है ,करो किसने मना किया है ,बड़े काम के साथ छोटे काम भी करो ,क्यो की कोई काम छोटा नही होता पर खोटा काम मत करो ,खोटे सिक्के बाजार में बहुत दिन नही चलते ,चलते है तो अर्थ व्यवस्था को चोट पहुचाते है और चोट खाई हुई बात ,व्यवस्था ,व्यक्ति ,समाज पंगु हो जाती है सुधरने में वक्त लगता है ,किसी को बनने में जितना समय लगता है उससे कम समय उसे नष्ट करने में लगता है
राम खिलावन का मन ,मनो का हो गया और मनो का मन लिए राम खिलावन चिंतन कर रहे है
क्या हो गई मेरे देश की हालत ,क्या होगा अंजाम
कितना बदल गया इन्शान ,
ओ कितना बदल गया इन्शान
मानव से हम महा मानव बनने की जुगत में है ,क्या इसी तरह हम महा मानव बनेगे की मदद की आड़ में इज्जत से खिलवाड़ ...............
राम खिलावन ने अपने बचपन में एक कहानी पढ़ी थी ,हार जीत ,सायद आपने भी पठी होगी ,उस कहानी में एक थे बाबा भारती और एक था डाकू खड़क सिंह ,बाबा भारती के पास एक घोड़ा था जिसे वो बहुत प्यार करते थे ,डाकू खड़क सिंह उस घोडे को ,अपाहिज बन कर ,एक राह के किनारे पड़ा रहा और जब बाबा भारती वह से गुजरे तो मदद मांगी की मुझ अपाहिज को अगले गाव तक छोड़ दो ,बाबा भारती सहज भाव से मदद करते थे ,वे घोडे से उतर गए और उन्होंने अपाहिज बने डाकू खड़क सिंह को घोडे में बिठा दिया थोडी दूर तक तो डाकू खड़क सिंह ,अपाहिजों की तरह घोडे में पड़ा रहा ,और बाबा भारती ,अपने प्यारे घोडे की लगाम हाथ में लिए आगे आगे चलते रहे की अचानक एक झटके से अपाहिज बना डाकू खड़क सिंह ,अपने मूळ रूप में आ गया और घोडे को ले भगा ,बाबा भारती देखते ही रह गए ,अब डाकू खड़क सिंह को अपनी मन चाही चीज मिल गई थी और वो बहुत खुश हो रहा था ,बाबा भारती पैदल ही चल रहे थे ,डाकू खड़क सिंह लौटा और बाबा भारती से बोला देखो तुम उस तरह नही दे रहे थे तो इस तरह मैंने ले लिया घोडे को ,बाबा भारती बस इतना बोले ,खड़क सिंह तुमने घोड़ा ले लिया कोई बात नही ,पर कभी किसीसे यह मत कहना की मैंने इस तरह घोडे को लिया है या छुडाया है अपाहिज बन कर ,नही तो लोगो का गरीबो के ऊपर से विश्वाश उठ जाएगा ,तुम घोड़ा ले जाओ ...........
दुसरे दिन जब रोज की तरह जब बाबा भारती ,सुबह जगे तो घोड़ा अपनी जगह ही मिला ,डाकू खड़क सिंह ने घोड़ा
लौटा दिया था और वह फ़िर बाबा भारती के पास आ गया था ........
कहानी कुछ इसी तरह है ,अब हम जो कहानिया बना रहे है , उनमे कौन बाबा भारती हैऔर कौन डाकू खड़क सिंह ,कहना मुश्किल है ,क्यो की युग बदल गया युग का धर्म बदल गया ,लोग बदल गए ,लोगो के विचार बदल गए ,लेकिन ये बदला किसने ?
समाज बदल गया ,सभ्यता बदल गई ,देश बदल गया ,प्रदेश बदल गया सब सुनहरे कल की ओर दौड़ रहे है अंधे ,लंगडे सब ,कोई पात्रता नही सब बराबर है दौड़ में ,कोई धक्का दे कर ,कोई सीने में ,लात रख कर ,कोई सब कुछ लूट कर ,कोई सब कुछ लूटा कर दौड़ रहे है कुछ लुट लूटा गए ,कुछ लूट लिए गए ,लुटने वाले और लूटने वाले सब कहा के है यह कोई खोज और शोध का विषय नही है अपने मन को टटोलिये सब मिल जाएगा सब दिख जाएगा ............................................
राम खिलावन कह रहे है रहिमन पानी राखिये ,बिन पानी सब सून ..............................
यह भी कह रहे है की यहाँ ,जहा नारी की इज्जत नही है तो देवता भी नही होंगे वहा ,यहाँ ................जब भगवन ही नही है तो भक्त भी नही होंगे वहा ,यहाँ ,तो फ़िर क्या होगा ,
राम खिलावन का चिन्तन जारी है ,क्या हम वाकई सुनहरे कल की ओर बढ़ रहे है .............या बढ़ गए है

Thursday, June 18, 2009

राम खिलावन हाजिर है


पानी पर पहरा ,लगा है ,बलभद्र ने ताजे समाचारों से राम खिलावन को अवगत कराया पहरा लगा है मतलब ,पानी को नजर बंद कर दिया या पानी ने कुछ लफडा किया है पानी ने नही लोगो ने लफडा किया है और सालो साल से कर रहे है पानी के साथ पानी की न कभी इज्जत की और न ही सोचा की जल न होगा तो कल भी न होगा ,जो जितना कर सकता था बर्बाद उतना किया अब पानी की बारी है तो लोगो ने पानी पर पहरा लगा दिया कर क्या रहे है लोग राम खिलावन ने बोला
रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून
पानी गए न उबरे मोटी मानुष चू न
रहिमन दादा की बाते लोग भूल गए ,रहिमन क्या केवल किताबो के पन्नो में ही रह गए क्या ? दफ़न होके वाह मेरे देश वाह ,और देश के नागरिक तो अदभुत है ही ,कितने पाखंडी है हम ,कभी सोचा है आपने अपने बारे में ,पाखंड ओठे टहल रहे है हम गर्भवती महिलाओ की तरह ,आ,उ करते ,कब करेंगे कुछ ,या यूही ,अपने गिरेबान में न झांक कर दूसरो पर ही दोष
nikaalte nikaalte मर जायेंगे ,marenge क्या मरे तो है ही ,येअलग बात है की jalaaye बाद में जायेंगे
किसी दिन हम हवा को भी puuri nigalane wale है कहो कैसी रही ,बलभद्र
सरकार को तो कभी किसी को दोष देते हम aghaate नही है पेट नही भरता हमारा ,कभी bharega भी नही ,khali पेट बजा रहे हो बलभद्र ,कभी भरा पेट bajaaye हो बलभद्र ,bajana भी नही मर जाओगे
खाली dabba ,खाली botal लिए ghum रहे है पानी के लिए ,videshi तो सोना jwaharat ही ले गए थे पानी तो deshwashiyo के लिए छोड़ गए थे उसे हम ले मरे ,talabo से itana प्यार था की उस पर घर बन गए ,nadiyo से
भी हम प्यार करते थे की puujate थे ,अब कहा गई पूजा और कहा गई वो nadi
koin ले गया ,हमसे chura के ,हमसे भी बड़ा wala rha होगा वो ,है अपने में से ही ,hariyali किसने kaati पड़ोसी ने ,talab पर imarate किसने banai पड़ोसी ने हमने कुछ नही किया हमेशा की तरह ...........हम तो बस जी रहे है क्यो की ...................नही आती
राम खिलावन और बलभद्र aapas में बाते कर रहे थे की तभी किसी ने बोला हम vikash कर रहे है की vinash कुछ बोलो राम खिलावन ,हम sunhare कल की और ja रहे है या .............pahucha गए है ,बोलो न राम खिलावन
बलभद्र सोच रहा था ,sala daru भी तो पानी से बनती है ,usake लिए पानी की कमी नही है ,कोई पहरा नही है

Wednesday, June 17, 2009

राम खिलावन हाजिर है


राम खिलावन चुप चाप परे है ,खटिया में ,और चिंतन जारी है
रहिमन चुप हो बैठिये देख दिनन के फेर
अच्छे दिन जब आयेगे एको लगे न देर
राम खिलावन दिनों के फेर में बदलाहट देख ,रहीम की बात याद कर चिंतन कर रहे है की बिना ,अनुभव के तो रहीम दादा ने ये लिखा न होगा ,उनके भी दिन फिरे होगे जैसे घूर के फिरते है ,घूर पड़ा रहता है ,चुप चाप, लोग और घूर उसी घूर में डालते रहते है ,घूर में घूर नही डालेंगे तो किसमे डालेंगे ? तुम्हारे ऊपर फेके ,क्या ?
फेक दो ,हम भी घूर से क्या कम है ,लेकिनयाद रखना , घूर के भी दिन फिरते है बोलो क्या इरादा है ?अभी तो फेकेगे ही फ़िर की फ़िर देखि जायेगी
हम सब एक दुसरे के ऊपर क्या नीचे से भी घूर फेके जा रहे है अहिर्निश आस पास जो है सो है ही ,दूर से दूर बैठे जान और अनजान लोंगो पर भी घूर फेकने में पूरी ताकत लगाये रहते है पूरी उर्जा को हम दुसरे की बुराई देखने में ही झोके रहते है ,दुसरे की अच्छाई देखने में हमारी आँखों को मोतिया बिन्दु न हो जाए इस डर से देखते ही नही बलभद्र यही सोचता है और इलाके भर के लोगो के बारे में उसे वो हर बात पत्ता है जो उन्हें ख़ुद नही मालूम ,लोग
अपने बारे में सही सही पत्ता लगाने बलभद्र के पास आते है और बलभद्र उन्हें उनके बारे में वो सभी बाते दिल खोल कर बताते जो व्यक्ति विशेस को भी नही पत्ता होता और वह अपने बारे में इतनी सारी बाते जान कर , वो हट प्रद हो जाते,अचकचिया जाते किम कर्तव्य की भूमिका निभाने लगते और इस रोल को वे बखूभी निभाते निभाते घर पहुचते ,और मुह ओरमा के चित हो कर ,खटिया में धस जाते ,और धसे धसे कब सो जाते उन्हें ख़ुद पत्ता नही लगता जैसे उन्हें ख़ुद के बारे में पत्ता नही होता ,खैर फ़िर उनकी दयामयी पत्नी यानि की अर्धांगनी ,उस बेसुरे को जगाती ,जो बेसुध होते ,सुध में आते और फ़िर किग्न्कोंग की तरह अपने कर्तव्य शुरू कर देते
बलभद्र के पास सब का ईन्शाय्क्लूपिदिया है आप का भी है ...........................अपने बारे में यदि जानना हो तो ,आप बलभद्र से संपर्क कर सकते है
खैर ,मोतिया बिन्दु के डर से डरे नही ,कुछ नही होगा ,जब होना होगा तब आप रोक भी नही सकते ,हा ये बात जरुर है की यदि आप दूसरो की अच्छैया देखना सुरू कर देंगे तो निश्चित है की आपको मोतिया बिन्दु का प्रकोप नही होगा ,ये सब आप पर निर्भर करता है की आप क्या चाहते है ,घूर के दिन भी फिरते है ,आप के भी फिरेंगे ,हा घूर फिकवाते रहे आप ,अपने आप पर,पर उनका क्या होगा जो घूर फेक रहे है और फेके जा रहे है बिना रोक टोक ,
राम खिलावन का चिंतन यही है
निदक नियरे रखिये आगन कुटी छवाए ,बिन पानी साबुन बिना निर्मल होय सहाय
राम खिलावन के चिंतन से आप कितना सहमत है ये जरुरी नही है पर राम खिलावन का चिंतन जारी है साथ ही बलभद्र का भी .....................................










Tuesday, June 16, 2009

राम खिलावन


राम खिलावन हाजिर है






राम खिलावन हाजिर है

राम खिलावन हाजिर है




राम खिलावन सरकार को सरकते हुए देख रहे थे ,सरकते सरकते सरकार ,बेकरार हो गई थी ,राम खिलावन का चिंतन था की सरकार , बेकरार नही बेकार हो गई थी , बेकरार हो कर सरकार कुछ कदम उठाना चाह रही थी ,लेकिन उठा नही पा रही थी ,कोई कह रहा था की ,लकवा लग गया है ,राम खिलावन कह रहे थे की बहुत दिनों तक जिस अंग का उपयोग नही करोगे ,तो क्या होगा , यही होगा बलभद्र जो पास ही ताजे अखबार की सुर्खियों से ले कर ,सब कुछ पठने में तलीन थे अचानक बोल पड़े वही होगा जो मंजूरे खुदा होगा राम खिलावन बिफर पड़े ,ये क्या बात हुई ,जो सरकार को मंजूर होगा वह क्या नही होगा ? काहे को होगा ,बलभद्र बोले ,राम खिलावन से रहा नही गया ,बोले ,क्यो बे क्यो नही होगा ?
काकू तुम भी न ,कभी कभी जान के भी अनजान बने रहते हो ,हा ,हा बोलो बोलो क्या बोलना चाह रहे हो बे ,
काकू क्या तुम्हे मालूम है की खुदा की क्या मर्जी है ,जो हो जाता है वही तुम खुदा की मर्जी समझ लेते हो ,और कहते हो की यही खुदा की मर्जी है ,खुदा की मर्जी के आगे किसकी क्या चली है ,बोलो यही कहते हो ना हा बे यही कहता हु आगे बोल, राम खिलावन अपनी भ्रगुती तानते हुए बोले , काकू सुनो _क्या सरकार भ्रस्ताचार फैलाना चाहती है ?बलभद्र अपनी कछनी को एक विशेस दिशा की और घुमाते हुए बोले
राम खिलावन बोले _नही तो और हमने सुना भी नही की सरकार की कोई मनसा है ,तो फ़िर काहे बगरा है चारो और बिना सरकार की कोई योजना के ?,यह मान लिया जाए की सरकार की योजना के बिना भी बहुत सी योजनाये चलती रहती है क्या ? राम खिलावन भौचके से बोलते और सुनते रहे और यह भी सोच रहे थे की बलभद्र को ये कैसी बाते सूझने लगी है ये तो फिलासफर जैसी बाते करता है साला
बलभद्र बोले काकू ,सुनो जब खुदा की मर्जी के बिना कोई पत्ता नही हिलता तो बिना सरकार के मर्जी के कुछ हिल सकता है कोई योजना चल सकती है क्या तुम्ही बताओ
तो क्या यह मान लिया जाए की खुदा की और सरकार की मर्जी एक है और दोनों मिले हुए है और हम खुदा के बन्दे यहाँ अपनी.....................
कुल मिला , कर धक्का खाए गाजी मिया , मजा मारे मुजफ्फर
यही राम खिलावन का चिंतन उभर कर bahar आया
खैर जो हो,सो हो ,राम खिलावन आज बलभद्र की bato से avibhut हो चले थे और सोच रहे थे की बलभद्र को अपनी gaing में samil कर कुछ बुरा नही किया है बलभद्र के ये krantikari विचार सुन कर राम खिलावन की pulli thhili हो गई थी चिंतन कर रहे थे की क्या बलभद्र सही कह रहा था की दोनों मिले हुए है ,कुछ न कुछ तो है
और ये कुछ को तो राम खिलावन
pahale से ही talash रहे है ,मिला नही ये अलग बात है
राम खिलावन का चिंतन jari है ,बलभद्र अपनी
saykil में sawar हो दूर निकल गए थे कुछ ये gungunaate हुए ...........
ये malik तेरे बन्दे हम ..............
ease हो हमारे करम ......................................