सब के जीवन में सुख दुःख का आना जाना लगा रहता है मुझे ऐसा लगता है कि सुख दुःख ,जीवन में ,ऐसा होना चाहिए और ऐसा नहीं होना चाहिए के इर्द गिर्द घूमता है ये सुख दुःख भी किसे होता है हमें ? हमें से क्या मतलब है ,हम क्या है ,ये हाड़ मास का शरीर या फिर कुछ और ...............
जो कुछ भी दिखता है उसके अलावा भी बहुत कुछ है जो इन आखों से नहीं दिखता .दिखता भी है तो देखते नहीं
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